अब मंदाकिनी बेचारी नहीं रहेगी। इसके बचाने के साथ ही सतत प्रवाह बनाये रखने के फैसले यहां पर बैठी संसद करेगी। इस संसद में उद्गम से लेकर यमुना में मिलने के स्थान मोहना घाट तक के दोनो ओर के सभी गांवों से लोगों का प्रतिनिधित्व होगा। मंदाकिनी नदी संसद का संयोजक नयागांव के 'छोटे राजा' चौबे हेमराज चतुर्वेदी को बनाया गया।यह संसद सिर्फ मंदाकिनी के लिए ही नही बल्कि सरयू, पयस्वनी व झूरी नदी के लिए भी काम करेगी। इस संसद में नदी के दोनों ओर के गांवों के प्रतिनिधि होंगे। इसके लिए सबसे पहले नदी के किनारे दोनो तरफ के गांवों की पदयात्रा करके की जायेगी और हर गांव में प्रकृति प्रेमी लोग तलाशे जायेंगे। इस संसद में सभी वर्गो की भागीदारी सुनिश्चित करने का काम हेमराज चतुर्वेदी करेंगे। इसमें संत, महन्त, समाजसेवी, व्यापारी, छात्र, पत्रकार, महिलाएं सभी होंगे। परिसंवाद के दौरान ग्रामोदय विवि और रामभद्राचार्य विकलांग विवि के छात्रों ने नदी की पद यात्रा करने के लिए अपनी सहमति दी। उनका काम नदी के किनारे के कब्जे, प्रदूषण के कारक, जलीय वनस्पतियों का अध्ययन के साथ ही समीक्षात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही उनको जिम्मेदारी दी गई कि वे यात्रा के दौरान ग्रामीणों के साथ ही सभी लोगों को जल को बचाने की प्रेरणा देने का भी काम करेंगे। इसमें एक बात और निकल कर आयी कि मंदाकिनी को रामघाट के पास सर्वाधिक प्रदूषित सीवेज का पानी कर रहा है। बाद में परिसंवाद का मुख्य विषय हमारा चित्रकूट कैसा हो? पर आकर टिक गया। राजेन्द्र सिंह ने कहा कि मंदाकिनी नदी संसद इसके लिए आपस में परिसंवाद कर और फिर चिंतन मनन कर एक रिपोर्ट करे कि वास्तव में चित्रकूट का स्वरुप कैसा हो। दिल्ली से आये अरुण तिवारी ने कहा बुंदेलखंड के इस अलौकिक भूभाग की परिस्थितियां इशारा करती हैं कि यहां पर सरकार को विकास का अलग ही माडल विकसित करना चाहिये। यहां पर पानी वाले बाबा ने संतों के साथ ही स्थानीय लोगों से मंदाकिनी के बारे में चर्चा की।

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