
Sunday, July 19, 2009
Saturday, July 18, 2009
बाहर से आये शिवभक्तों ने भी बनाये महारुद्र

संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में सोमवार को स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आये शिव भक्त कांवरिये भी निर्माण स्थल पर पहुंच गये। उन्होंने भी श्रद्धा व आस्था के साथ रुद्रों का निर्माण करने के साथ ही पूजन किया।
प्रात:काल से ही स्थानीय व बाहर से आये भक्तों का हुजूम पहले स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ जी के दरबार में हाजिरी लगाने के पश्चात स्वामी कामतानाथ पहुंचा और उसके बाद उनका रुख सीधे रुद्र निर्माण पंडाल की तरफ हो गया। भक्तों ने भी काली मिट्टी से कटी गोलियों की सहायता से महारुद्रों का निर्माण किया। इसी बीच श्री रामअर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत के साथ ही महा मृत्युंजय मंत्र की आहुतियों के दौर भी यज्ञ मंडप में जारी रहे। दोपहर को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के कथा पंडाल पर आने पर उनके प्रवचन सुने। दोपहर बाद बनाये गये शिवलिंगं वाल्मीकी नदी में विसर्जित किया गया। पूजन करने व विसर्जन करने में फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, दीप राज राणा, पद्म सिंह मौजूद रहे।
प्रात:काल से ही स्थानीय व बाहर से आये भक्तों का हुजूम पहले स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ जी के दरबार में हाजिरी लगाने के पश्चात स्वामी कामतानाथ पहुंचा और उसके बाद उनका रुख सीधे रुद्र निर्माण पंडाल की तरफ हो गया। भक्तों ने भी काली मिट्टी से कटी गोलियों की सहायता से महारुद्रों का निर्माण किया। इसी बीच श्री रामअर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत के साथ ही महा मृत्युंजय मंत्र की आहुतियों के दौर भी यज्ञ मंडप में जारी रहे। दोपहर को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के कथा पंडाल पर आने पर उनके प्रवचन सुने। दोपहर बाद बनाये गये शिवलिंगं वाल्मीकी नदी में विसर्जित किया गया। पूजन करने व विसर्जन करने में फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, दीप राज राणा, पद्म सिंह मौजूद रहे।
दोस्ती करने पर अच्छाई में बदल जाती बुराई
धर्म अपनी कसौटी पर कसा जाता है, पर मर्म की कोई कसौटी नहीं होती। परमात्मा का जीवन ही परमार्थ के लिए है। संसार में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं एक योगी व दूसरा भोगी। योगी दिव्य चक्षुओं से भगवान का दर्शन कर लेते हैं, यह ऐश्वर्य लीला है। भोगियों को चर्म चक्षुओं से निराकार भगवान के दर्शन नहीं होते। इसलिये प्रभु को निराकार से साकार स्वरूप में आना पड़ा, यह प्रभु की माधुर्य लीला है। जीवन में दो बिंदु होते हैं एक साधक व बाधक। बुराई से दोस्ती करने पर ही भलाई के दर्शन होते हैं। अपने जीवन को उन्मुख बनाने के लिए परमात्मा के संसार की प्रत्येक वस्तु उपयोगी है, लेकिन उसमें चिंतन होना चाहिये। स्थानीय कलाकार विनय साहू ने चावल के दानों पर शिवलिंग व दाल के दानों पर दद्दा जी के चित्र के साथ चित्रकूट की प्राकृतिक सुषमा को दर्शाता तैल चित्र लेकर पहुंचा तो सभी लोग वाह-वाह कर उठे। विनय फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का भी चित्र दाल के दाने पर उकेर कर वहां पहुंचा था। दद्दा जी ने इस कलाकार को आशीर्वाद दिया।
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