धर्म अपनी कसौटी पर कसा जाता है, पर मर्म की कोई कसौटी नहीं होती। परमात्मा का जीवन ही परमार्थ के लिए है। संसार में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं एक योगी व दूसरा भोगी। योगी दिव्य चक्षुओं से भगवान का दर्शन कर लेते हैं, यह ऐश्वर्य लीला है। भोगियों को चर्म चक्षुओं से निराकार भगवान के दर्शन नहीं होते। इसलिये प्रभु को निराकार से साकार स्वरूप में आना पड़ा, यह प्रभु की माधुर्य लीला है। जीवन में दो बिंदु होते हैं एक साधक व बाधक। बुराई से दोस्ती करने पर ही भलाई के दर्शन होते हैं। अपने जीवन को उन्मुख बनाने के लिए परमात्मा के संसार की प्रत्येक वस्तु उपयोगी है, लेकिन उसमें चिंतन होना चाहिये। स्थानीय कलाकार विनय साहू ने चावल के दानों पर शिवलिंग व दाल के दानों पर दद्दा जी के चित्र के साथ चित्रकूट की प्राकृतिक सुषमा को दर्शाता तैल चित्र लेकर पहुंचा तो सभी लोग वाह-वाह कर उठे। विनय फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का भी चित्र दाल के दाने पर उकेर कर वहां पहुंचा था। दद्दा जी ने इस कलाकार को आशीर्वाद दिया।
Saturday, July 18, 2009
दोस्ती करने पर अच्छाई में बदल जाती बुराई
धर्म अपनी कसौटी पर कसा जाता है, पर मर्म की कोई कसौटी नहीं होती। परमात्मा का जीवन ही परमार्थ के लिए है। संसार में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं एक योगी व दूसरा भोगी। योगी दिव्य चक्षुओं से भगवान का दर्शन कर लेते हैं, यह ऐश्वर्य लीला है। भोगियों को चर्म चक्षुओं से निराकार भगवान के दर्शन नहीं होते। इसलिये प्रभु को निराकार से साकार स्वरूप में आना पड़ा, यह प्रभु की माधुर्य लीला है। जीवन में दो बिंदु होते हैं एक साधक व बाधक। बुराई से दोस्ती करने पर ही भलाई के दर्शन होते हैं। अपने जीवन को उन्मुख बनाने के लिए परमात्मा के संसार की प्रत्येक वस्तु उपयोगी है, लेकिन उसमें चिंतन होना चाहिये। स्थानीय कलाकार विनय साहू ने चावल के दानों पर शिवलिंग व दाल के दानों पर दद्दा जी के चित्र के साथ चित्रकूट की प्राकृतिक सुषमा को दर्शाता तैल चित्र लेकर पहुंचा तो सभी लोग वाह-वाह कर उठे। विनय फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का भी चित्र दाल के दाने पर उकेर कर वहां पहुंचा था। दद्दा जी ने इस कलाकार को आशीर्वाद दिया।
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