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Friday, August 28, 2009


संत तुलसी की जन्म भूमि में यमुना नदी के तुलसी घाट पर मछलियों व जलचर जीवों का शिकार रोके नहीं रुक रहा है।
तुलसी घाट व आस पास मत्स्य आखेट से श्रद्घालुओं की धार्मिक भावनायें दूषित होती हें। इसके साथ ही दिनों दिन यमुना नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। उनका कहना है कि जल को प्रदूषण से मुक्त रखने में मछलियों व जल जीवों का बहुत बड़ा योगदान है। वे बताते हैं कि इस मामले में पूर्व जिलाधिकारी सुभाष चन्द्र शर्मा ने यहां पर मत्स्य आखेट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने पूर्व जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र की प्रति दिखाते हुए बताया कि तुलसी घाट के 1-1 कि मी पूरब व पश्चिम तक मत्स्य आखेट व जलीय जन्तुओं का शिकार व आखेट पर पूरी तरह पाबन्दी का निर्देश जारी करते हुये इसके क्रियान्वयन हेतु एस डी एम मऊ, नगर पंचायत राजापुर व थानाध्यक्ष राजापुर को जारी किया गया था। लेकिन इस मामले पर किसी भी स्तर पर कोई कारगर कार्यवाही नही की गयी। नगर पंचायत एवं एस डी एम मऊ द्वारा न तो उपरोक्त सम्बंध कोई दिशा निर्देश का कार्यान्वयन किया गया न ही घाट के पूरब व पश्चिम सीमा आदि निर्धारित करते हुये बोर्ड आदि लगवाये गये। हां इतना जरूर है कि स्थानीय स्तर पर मंदिर प्रबन्धन द्वारा थाना में सूचना देने पर घाट पर बरवा डालने वालों को शिकार का प्रयास करते इक्का दुक्का लोगों को पकड़ने या खदेड़ने का कार्य किया गया है। कि एक ओर जहां शासन प्रशासन समाज सेवी संगठन विभिन्न स्तरों पर जल संरक्षण तथा जल व नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिये ढिंढोरा पीट रहे हैं वही दूसरी ओर जल को प्रदूषण मुक्त रखने में सर्वाधिक महत्व मछलियों व जलचर जीवों के आखेट की अनदेखी कर रहे है। उन्होंने जिलाधिकारी से तुलसी घाट के 1-1 कि मी पूरब व पश्चिम तक मत्स्य आखेट व जलचर जीवों के शिकार का कारगर उपाय कर पूर्व जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश का पालन करायें जाने की मांग की है।